लोट्टोलैंड लाइव ब्लैकजैक

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time:2021-10-29 01:34:45 क्‍या आपको फंड ऑफ फंड्स में निवेश करना चाहिए? Views:4591

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हाल में कई फंड ऑफ फंड्स (एफओएफ) लॉन्‍च हुए हैं. इस तरह निवेशकों के पास चुनने के लिए विकल्पों की कमी नहीं है.
हाल में कई फंड ऑफ फंड्स (एफओएफ) लॉन्‍च हुए हैं. इस तरह निवेशकों के पास चुनने के लिए विकल्पों की कमी नहीं है. हालांकि, एक बात हर निवेशक को ध्‍यान रखने की जरूरत है. चूंकि एफओएफ दूसरी म्‍यूचुअल फंड स्‍कीमों में निवेश करते हैं. लिहाजा, डुप्‍लीकेशन की कॉस्‍ट आ सकती है. इसका मतलब है कि निवेशकों को ओरिजनल स्‍कीम के साथ ही एफओएफ के एक्सपेंस रेशियो का भार भी उठाना पड़ सकता है.

इस बात को उदाहरण से समझते हैं. मान लेते कि निवेशक हाल में लॉन्‍च निप्‍पॉन इंडिया एसेट अलोकेट एफओएफ में निवेश करते हैं. इस मामले में उन्‍हें एफओएफ का एक्‍सपेंस रेशियो 0.19 फीसदी उठाना पड़ेगा. साथ ही वह एफओएफ जिन स्‍कीमों में निवेश करेगा, उनके वेटेड एवरेज एक्‍सपेंस रेशियो का भार भी निवेशकों पर आएगा. इस मामले में तीन स्‍कीमें हैं, निप्‍पॉन इंडिया स्‍मॉलकैप फंड (1.06%), निप्पॉन इंडिया ग्रोथ फंड (1.26%) और निप्पॉन इंडिया लॉर्जकैप फंड (1.18%).

आपको एफओएफ रूट का इस्‍तेमाल सिर्फ तभी करना चाहिए अगर अतिरिक्‍त कॉस्‍ट उचित है. आइए, जानते हैं कि इस फैसले तक पहुंचने में आपको किन बातों का ध्‍यान रखना चाहिए.

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आपके रिटर्न प्रोफाइल में फिट हो स्‍कीम
प्राइमरी स्‍कीम यानी घरेलू म्‍यूचुअल फंड स्‍कीम का उपलब्‍ध न होना एफओएफ रूट लेने का एक कारण हो सकता है. इससे भी अधिक महत्वपूर्ण यह है कि इस नई स्‍कीम को आपके पोर्टफोलियो प्रोफाइल में फिट होना चाहिए.

क्रेडेरे वेल्‍थ पार्टनर्स में प्रोडक्‍ट और रिसर्च के हेड अरुण गोपालन कहते हैं, ''निवेशकों को जिस स्‍कीम में निवेश किया जा रहा है, उसे देखना चाहिए. साथ ही यह भी पता लगाना चाहिए कि उससे क्‍या मकसद हल हो रहा है.''

एलआरएस के जरिये सीधे निवेश करने में क्‍या दिक्‍कत है?
आप पूछ सकते हैं कि लिबरलाइज्ड रेमिटेंस स्‍कीम (एलआरएस) का इस्तेमाल करते हुए सीधे विदेशी शेयरों में क्‍यों निवेश नहीं किया जा सकता है. यह बिल्‍कुल सही है कि आप सीधे निवेश कर सकते हैं. लेकिन, उसके लिए आपको काफी विशेषज्ञता की जरूरत होगी. इस बात को ध्‍यान रखना चाहिए कि भारतीय फंड हाउस सीधे इंटरनेशनल सेगमेंट में सिर्फ इसलिए नहीं हाथ आजमा रहे हैं क्योंकि उनके पास यहां निवेश करने की कुशलता नहीं है.

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आप इंटरनेशनल फंडों या एक्‍सचेंज ट्रेडेड फंड में निवेश कर काफी हद तक विशेषज्ञता के मसले को हल कर सकते हैं. हालांकि, यह एक और परेशानी खड़ी करेगा. वह है एलआरएस व्यवस्था के तहत रिपोर्ट‍िंग की.

हाल में लॉन्‍च हुए एफओएफ
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जहां एफओएफ रूट का इस्‍तेमाल ग्‍लोबल डायवर्सिफिकेशन के लिए इस्‍तेमाल किया जा सकता है. वहीं, अच्‍छा होगा कि घरेलू थीम के लिए इससे बचा जाए.

घरेलू एफओएफ की उपयोगिता कम
बात जब घरेलू परिदृश्य की आती है तो एफओएफ की उपयोगिता घट जाती है. हाल में लॉन्‍च कई एफओएफ अपने ही ईटीएफ में पैसा लगाएंगे. इस मामले में वैल्यू एडिशन कम है. कारण है कि निवेशक सेकेंडरी मार्केट से प्राइमरी ईटीएफ सीधे खरीद सकते हैं. हालांकि, यह निवेशकों के एक धड़े के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है.

प्‍लान अहेड वेल्थ एडवाइजर्स के सीईओ विशाल धवन कहते हैं कि जिन म्‍यूचुअल फंड निवेशकों के पास डीमैट या ट्रेडिंग अकाउंट नहीं है, उनके लिए ईटीएफ में एफओएफ निवेश उपयोगी होगा.

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इंडेक्‍स फंडों की तरह ईटीएफ अमूमन किसी खास मार्केट इंडेक्स को ट्रैक करते हैं. इनका प्रदर्शन उस इंडेक्‍स जैसा होता है.चूंकि एफओएफ दूसरी म्‍यूचुअल फंड स्‍कीमों में निवेश करते हैं. लिहाजा, डुप्‍लीकेशन की कॉस्‍ट आ सकती है.सिप टॉप-अप फैसिलिटी के बारे में यहां जानिए अपने हर सवाल का जवाब

निवेशकों के सोने का आकर्षण बढ़ा है. वित्त वर्ष 2020-21 में गोल्ड एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स (ईटीएफ) में निवेशकों ने 6,900 करोड़ रुपये डाले.नेशनल पेंशन सिस्टम (एनपीएस) में लोगों की दिलचस्पी बढ़ाने की कई कोशिश की जा रही है.फ्रैंकलिन टेम्पलटन के निवेशकों को इस हफ्ते मिलेंगे 2,962 करोड़ रुपये

फ्रैंकलिन टेम्पलटन म्यूचुअल फंड की बंद हो चुकी स्कीमों के निवेशकों को इस हफ्ते पैसे मिल जाएंगे. छह स्कीमों के निवेशकों को 2,962 करोड़ रुपये इस हफ्ते मिल जाएंगे.एक साल पहले इस फंड के अनुभवी मैनेजर ने इस्तीफा दिया. हालांकि, स्‍कीम की बागडोर मजबूत प्रबंधन के हाथों में है. निवेश के तरीके में कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ है.बुजुर्गों को मिले ज्‍यादा ब्‍याज, एससीएसएस की लिमिट बढ़ाकर ₹50 लाख की जाए

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सामान्‍य सिप के मामले में निवेशक सिप की अवधि में अपना कॉन्ट्रिब्‍यूशन नहीं बढ़ा सकते हैं. अगर वे इसे बढ़ाना चाहते हैं तो उन्‍हें नए सिरे से सिप शुरू करना होगा या एकमुश्त निवेश करने की जरूरत होगी.

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भारतीय नियामकों का ऐसी करेंसी को लेकर रुख स्पष्ट नहीं है. उन्‍होंने साफ-साफ कुछ भी नहीं कहा है कि भारतीय इनमें ट्रेड करें या नहीं.

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शेयरों में निवेश से जुड़े जोखिम के अलावा इंटरनेशनल फंड में निवेश से करेंसी का जोखिम भी जुड़ा होता है. दूसरे देश की मुद्रा के मुकाबले रुपये में कमजोरी और मजबूती का असर आपके रिटर्न पर पड़ता है.

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सक्रिय रूप से मैनेज किए जाने वाले लार्ज कैप म्‍यूचुअल फंड के तौर-तरीकों का पिछले कुछ सालों में सभी को पता लग गया है. कुछ को छोड़ ज्यादातर स्कीमों ने प्रमुख सूचकांकों से कमतर प्रदर्शन किया है.

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